फगवाड़ा के कुछ प्राइवेट स्कूल सरकारी नियमों के मुताबिक बच्चों को नहीं देना चाहते फ्री शिक्षा राइट फॉर एजुकेशन एक्ट के कानून की नहीं स्कूलों को परवाह सरकार ने जारी किया स्कूलों को पत्र फगवाड़ा एक्सप्रेस न्यूज़ करेगा पूरे मामले का जल्द खुलासा।। फगवाड़ा एक्सप्रेस न्यूज़ विनोद शर्मा

पंजाब
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फगवाड़ा एक्सप्रेस न्यूज़।। विनोद शर्मा।।

फगवाड़ा के मुख्य होशियारपुर रोड पर प्राइवेट स्कूल राइट फॉर एजुकेशन एक्ट के तहत नियमों की पालना नहीं कर रहे है सरकार को इन स्कूलों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं  शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों को एक पत्र जारी किया है जिसमें कहा गया है कि राइट फॉर एजुकेशन के तहत स्कूलों को पत्र प्राप्त हुए हैं पत्र में कहा गया है कि राइट फॉर एजुकेशन एक्ट के तहत नियमों की पालना की जाए नहीं तो शिक्षा विभाग की तरफ से सख्त एक्शन लिया जाएगा पत्र में कहा गया है कि डीसी के अंतर्गत बनी कमेटी की तरफ से बताया जाता है जब तक कमेटी का कोई फैसला ना आ जाए तब तक किसी को भी परेशान ना किया जाए फगवाड़ा एक्सप्रेस न्यूज़ जल्द ही उन प्राइवेट स्कूलों के नाम का खुलासा करेगा जो स्कूल राइट फॉर एजुकेशन एक्ट के नियमों की पालना नहीं कर रहे

देखें।।

क्या है सरकार का राइट फॉर एजुकेशन एक्ट।।

शिक्षा का अधिकार, 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए एक मौलिक अधिकार है, जो उन्हें मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करता है। यह अधिकार शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 द्वारा स्थापित किया गया था, जिसने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत शामिल किया। इस अधिनियम के तहत, सरकार यह सुनिश्चित करती है कि हर बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे और किसी भी बच्चे को शुरुआती शिक्षा पूरी होने से पहले स्कूल से नहीं निकाला जा सकता। 

मुख्य विशेषताएं:

आयु वर्ग: 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है, चाहे उनकी जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति कुछ भी हो।

अनिवार्य शिक्षा: किसी भी बच्चे को शुरुआती शिक्षा पूरी होने तक रोका, निष्कासित या बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

प्रवेश से इनकार नहीं: किसी भी बच्चे को आयु प्रमाण पत्र के अभाव में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता है।

निजी स्कूलों की भूमिका: सभी निजी स्कूलों को अपनी 25% सीटें वंचित समूहों के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं, जिसकी भरपाई सरकार द्वारा की जाती है।

मानदंड और मानक: अधिनियम सभी स्कूलों के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करता है, जिसमें कक्षाएं, शौचालय और पुस्तकालय जैसी बुनियादी ढांचे की उपलब्धता शामिल है।

शिक्षक योग्यता: यह सुनिश्चित करता है कि सभी शिक्षक प्रशिक्षित और योग्य हों।

पड़ोस में स्कूल: अधिनियम के तहत, स्कूलों को बच्चों के पड़ोस में स्थापित किया जाना चाहिए ताकि सभी को स्कूल तक पहुंच मिल सके।

कोई कैपिटेशन शुल्क नहीं: कोई भी स्कूल प्रवेश के लिए कोई कैपिटेशन शुल्क नहीं ले सकता है।

फगवाड़ा के मुख्य होशियारपुर रोड पर प्राइवेट स्कूल राइट फॉर एजुकेशन एक्ट के तहत नियमों की पालना नहीं कर रहे है सरकार को इन स्कूलों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों को एक पत्र जारी किया है जिसमें कहा गया है कि राइट फॉर एजुकेशन के तहत स्कूलों को पत्र प्राप्त हुए हैं पत्र में कहा गया है कि राइट फॉर एजुकेशन एक्ट के तहत नियमों की पालना की जाए नहीं तो शिक्षा विभाग की तरफ से सख्त एक्शन लिया जाएगा पत्र में कहा गया है कि डीसी के अंतर्गत बनी कमेटी की तरफ से बताया जाता है जब तक कमेटी का कोई फैसला ना आ जाए तब तक किसी को भी परेशान ना किया जाए फगवाड़ा एक्सप्रेस न्यूज़ जल्द ही उन प्राइवेट स्कूलों के नाम का खुलासा करेगा जो स्कूल राइट फॉर एजुकेशन एक्ट के नियमों की पालना नहीं कर रहे

देखें।।
क्या है सरकार का राइट फॉर एजुकेशन एक्ट।।

शिक्षा का अधिकार, 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए एक मौलिक अधिकार है, जो उन्हें मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करता है। यह अधिकार शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 द्वारा स्थापित किया गया था, जिसने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत शामिल किया। इस अधिनियम के तहत, सरकार यह सुनिश्चित करती है कि हर बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे और किसी भी बच्चे को शुरुआती शिक्षा पूरी होने से पहले स्कूल से नहीं निकाला जा सकता।
मुख्य विशेषताएं:
आयु वर्ग: 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है, चाहे उनकी जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति कुछ भी हो।
अनिवार्य शिक्षा: किसी भी बच्चे को शुरुआती शिक्षा पूरी होने तक रोका, निष्कासित या बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।
प्रवेश से इनकार नहीं: किसी भी बच्चे को आयु प्रमाण पत्र के अभाव में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता है।
निजी स्कूलों की भूमिका: सभी निजी स्कूलों को अपनी 25% सीटें वंचित समूहों के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं, जिसकी भरपाई सरकार द्वारा की जाती है।
मानदंड और मानक: अधिनियम सभी स्कूलों के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करता है, जिसमें कक्षाएं, शौचालय और पुस्तकालय जैसी बुनियादी ढांचे की उपलब्धता शामिल है।
शिक्षक योग्यता: यह सुनिश्चित करता है कि सभी शिक्षक प्रशिक्षित और योग्य हों।
पड़ोस में स्कूल: अधिनियम के तहत, स्कूलों को बच्चों के पड़ोस में स्थापित किया जाना चाहिए ताकि सभी को स्कूल तक पहुंच मिल सके।
कोई कैपिटेशन शुल्क नहीं: कोई भी स्कूल प्रवेश के लिए कोई कैपिटेशन शुल्क नहीं ले सकता है।

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